भिण्ड का ऐतिहासिक गौरव

जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, भिण्ड की स्थापना 11-03-1919 में की गई थी। मध्य प्रदेश के चंबल संभाग में स्थित भिंड अपने समृद्ध और गौरवशाली अतीत, चंबल के बीहड़ों और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए जाना जाता है। इसका इतिहास भदौरिया और चौहान राजाओं के शौर्य, गोहद के जाट शासकों के नेतृत्व और 1956 में मध्य प्रदेश में इसके विलय से जुड़ा है।

पौराणिक भिंड : महाभारत युद्ध के दौरान यमुना और विन्ध्य के मध्य पुरे क्षेत्र में चेदियों का निबास था l राजा कासु चैद्य (महाभारत में वासु के नाम से प्रख्यात) का उल्लेख ऋग्वेद में दानस्तुति के एक श्लोक में किया गया है l पौराणिक साहित्य ने इन चेदियों को यदुओं के वंशज के रूप में प्रस्तुत किया है । पौराणिक परंपरा के अनुसार मनु के पौत्र पुरुर्वा जो चन्द्रवंश के संस्थापक हैं, ने कदाचित मालवा एवं पूर्वी राजपुताना और संभवत: भिंड जिले को भी घेरते हुए अपने साम्राज्य का बिस्तार गंगा के दोआब में किया । उनके प्रपौत्र अयाति ने पूरे मध्यदेश और आसपास के क्षेत्र को कम कर दिया । उनके बाद उनके पुत्र यादवों के जनक यदु चंबल, बेतवा और केन नदियों से सिंचित क्षेत्र के राजा बन गए । ह्यैयाओं द्वारा यदुओं को उखाड़ फेंका गया और ह्यैयाओं को विदर्भ के यदुओं द्वारा नष्ट नाबूद कर दिया गया l राजघराने के कृष्ण नाम का एक सदस्य चेदि – देश जिसमे यमुना के दक्षिण तथा केन एवं चम्बल के मध्य की भूमि सम्मिलित थी, का राजा बन गया l इस प्रकार भिंड जिला आर्यों के अधीन आ गया l चेदि देश का पौराणिक सूची में उल्लेख है l 6 वीं सदी ईसा पूर्व में यह सोलह महाजनपदों में से एक था। कुछ समय बाद यादव वंश का चेदि राजा को हस्तिनापुर के राजा कुरुके एक वंशज बासु द्वारा परास्त कर दिया गया । कुछ पीढ़ियों के बाद इस वंश का चेदि राजा शिशुपाल था, जिसने भगवान कृष्ण को पांडवों के राजसूय यज्ञ के दौरान गालियाँ दी थीं और जिसका वध श्रीकृष्ण द्वारा इंद्रप्रस्थ में किया गया था ।

मौर्य : अशोक के शिलालेखों के वितरण से पता चलता है कि तीसरी सदी ईसा पूर्व में वह एक विशाल साम्राज्य जिसमे विल्कुल दक्षिण के चार राज्यों को छोड़कर पूरा भारतबर्ष था, का स्वामी था l गूजर में विद्यमान अशोक का शिलालेख (आसन्न दातिया जिले में) इस क्षेत्र से मौर्यों के घनिष्ठ संबंधों को प्रमाणित करता है l अशोक ने अपना साम्राज्य अपने पिता बिन्दुसार और बाबा चन्द्रगुप्त मौर्य से प्राप्त किया था l

बैंक के मुख्य उद्देश्य (Bank's Objective)

बैंक का प्राथमिक उद्देश्य जिले के ग्रामीण और कृषि ढांचे को सुदृढ़ बनाना है। बैंक द्वारा भिण्ड जिले के कृषकों को मुख्य रूप से अल्पावधि कृषि ऋण, मध्यावधि ऋण एवं दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे किसानों को कृषि संबंधी समस्त आवश्यकताओं की समय पर पूर्ति हो सके और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो।

आधुनिक उत्पाद एवं सेवाएँ (Products & Services)

कृषकों और सामान्य नागरिकों के सर्वांगीण विकास के लिए बैंक लगातार अपनी तकनीकी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। बैंक द्वारा वित्तीय वर्ष में व्यापक स्तर पर अल्पकालीन ऋण वितरण किया गया है। इसके अतिरिक्त, बैंक द्वारा ग्राहकों को तीव्र एवं सुरक्षित वित्तीय लेनदेन सुनिश्चित करने हेतु आधुनिक बैंकिंग सेवाएँ जैसे:

  • RTGS / NEFT: रियल टाइम फंड ट्रांसफर की सुगम व्यवस्था।
  • लॉकर सुविधा: आपके कीमती सामान की सुरक्षा के लिए सुरक्षित लॉकर।
  • Bharat Aadhaar Seeding Enabler (BASE): प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को आसान बनाने वाली अत्याधुनिक डिजिटल सेवा।

हमारा नेटवर्क (Network Structure)

बैंक की पहुँच भिण्ड जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तृत है। वर्तमान में बैंक का नेटवर्क भिण्ड जिले में सुव्यवस्थित रूप से फैला हुआ है, जिसमें शामिल हैं:

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पूर्णतः कंप्यूटरीकृत शाखाएँ

संबद्ध सहकारी संस्थाएँ

इन्हीं सुदृढ़ माध्यमों और शाखाओं के सहयोग से संपूर्ण जिले में अमानत संग्रहण (Deposits) एवं ऋण वितरण (Loan Distribution) की बैंकिंग गतिविधियाँ अत्यंत सुचारू और पारदर्शी रूप से संचालित की जाती हैं।